शल्लकी के उपयोग‚ लाभ और नुकसान – Boswellia Serrata (Shallaki) Benefits in Hindi

Shallaki Benefits in Hindi : शालाकी (शल्लकी) को लोबान भी कहते हैं। यह एक आयुर्वेदिक औषधि है जो कि बहुत ही लाभकारी होती है। आप शालाकी या लोबान के बारे में बहुत कुछ जानते होंगे और इसे अक्सर प्रयोग में लाते होंगे, लेकिन आपको पता नहीं होगा कि शालाकी एक अद्भुत जड़ी-बूटी भी है ,जो कई रोगों को ठीक कर सकती है। आयुर्वेद के अनुसार, शालाकी का उपयोग (Boswellia Serrata in hindi) जोड़ों के दर्द और सूजन, ल्यूकोरिया, कब्ज और बवासीर सहित कई रोगों में लाभकारी होता है। इसका इस्तेमाल प्रायः घरों में पूजा-पाठ के दौरान धूप जलाने में किया जाता है, क्योंकि यह एक सुगन्धित जड़ी बूटी भी है।

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शालाकी क्या है? (What is Shallaki?)

शालाकी (sallaki)एक आयुर्वेदिक औषधि है, इसके पेड़ की छाल राख के रंग की होती है। इसके पत्ते नीम की पत्तियों की तरह ही होते हैं, जिन पर सफ़ेद रंग के फूल लगे होते हैं। हाथी बड़े चाव से इसके पत्तों को खाते हैं जिसके कारण इसको गजभक्ष्या भी कहते है । शालाकी (लोबान) का पेड़ लगभग 18 मीटर तक ऊँचा हो सकता है। इसके पेड़ में कई शाखाएं और पत्ते होते हैं। शालाकी के पेड़ की छाल पतली और चिकनी होती है, और इसका तना गोंदयुक्त होता है। शालाकी की छाल सफेद, लालिमायुक्त पीली या हरी रंग की होती है। सदियों से इसका उपयोग गठिया विरोधी जड़ी बूटी के रूप में किया जा रहा है अर्थात इसका उपयोग गठिया रोग के इलाज़ में भी किया जाता है ।

शालाकी कहाँ पाया जाता है? (Where is Shallaki found?)

शालाकी(shallaki) का पौधा भारत में मुख्यतः गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उड़ीसा, असम और असम और आंध्र प्रदेश के जंगलों में पाया जाता है।

अन्य भाषाओं में शालाकी के नाम

शालाकी का लैटिन नाम बॉसवेलिया सेरेटा (Boswellia Serrata) है, जो बारसरेसी कुल का एक सदस्य है जिसका English में नाम Indian Olibanum Tree (इण्यिनम ओलीबेनम ट्री) है ।

Hindi में शालाकी कों सालई, शल्लकी ,सलई गूगुल, लबान भी कहते है।

शालाकी के उपयोगी भाग

शालाकी एक आयुर्वेदिक औषधि है । इसकी छाल और गोंद का प्रयोग कई रोगों को दूर करने के लिये सदियों से होता चला आ रहा है। इसके गोंद को धूप इसकी छाल बहुत ही फायदेमंद होती है । यह पूजा–पाठ में लोबान के रूप में प्रयोग की जाती है। कई दवा निर्माताओं के द्‍वारा इसके कैप्‍सूल भी बनाये जाते है जो आसानी से मेडिकल स्‍टोर पर मिल जाते है जिनका सेवन आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह किया जा सकता है।

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शालाकी (लोबान) के फायदे (Benefits of Shallaki)

शालाकी एक आयुर्वेदिक औषधि है , इसका उपयोग बहुत से रोगों के इलाज़ में किया जाता है। इसके उपयोग और फायदे निम्नलिखित है :-

सिरदर्द में लाभदायक शालाकी (Shallaki Benefits in Reducing Headache)

शालाकी सिरदर्द में तुरन्‍त लाभ पहुंचाता है। इसके लिये रोगी को शालाकी की छाल को पीसकर माथे यानि ललाट पर लगाना चाहिये। ललाट पर लगाने से सिरदर्द में राहत मिलती है।

आँखों के रोग में लाभदायक शालाकी (Benefits of Shallaki to Cure Eye Disorder)

शालाकी आँखों के रोग में लाभदायक है । शालाकी (लोबान) के रस में चीनी और शहद मिलाकर आँखों में काजल की तरह लगाएं। इससे आँख आने की समस्या में राहत मिलती है।

दांतों के दर्द में सहायक शालाकी (Helpful for Dental pain)

शालाकी दांत दर्द में भी लाभदायक होती है । शालाकी (लोबान) के पेड़ की छाल को चबाने से दाँतों का हिलना की समस्‍या में राहत मिलती है और दर्द भी दूर होता है।

गले के रोग में लोबान के फायदे मंद (Loban Benefits to Treat Throat Disease)

गले के रोग में शालाकी की गोंद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । गले की गांठो में लाभ पाने के लिये गुनगुने पानी में शालाकी के गोंद को घिसकर लेप बना लें और इस लेप को गले पर लगायें। इसको लगाने से गले के गांठों की परेशानी में काफी फायदा होता है।

सांसों के फूलने की परेशानी में शालाकी (लोबान) के फायदे (Shallaki Benefits in Respiratory Disease)

शालाकी साँस फूलने की परेशानी को दूर करने में काफी फायदेमंद है। सांस की परेशानी को दूर करने के लिये 2 से 4 ग्राम शालाकी चूर्ण में एक–एक चम्‍मच घी और शहद में मिला लें। प्रतिदिन इसका सेवन करने से सांस फूलना के बीमारी ठीक हो जाती है।

पेचिश में लोबान के फायदे (Loban Benefits in Dysentery)

  • शालाकी पेचिश में भी फायदेमंद होती है । 1-2 ग्राम शालाकी, बेर, जामुन, प्रियाल, आम तथा अर्जुन की छाल के बारीक चूर्ण को अलग-अलग दूध में घोल लें या एक साथ सभी पाउडर को मिला कर घोल लें। फिर इसमें शहद मिला कर पियें इससे खूनी पेचिश ठीक होती है।
  • बकरी के दूध में 2-4 ग्राम बारीक चिरौंजी, सेमल, पीपल, शालाकी और तिनिश (काला पलाश) की छाल का चूर्ण मिलाएं। फिर इस दूध में शहद में मिलाकर पियें। इसको पीने से खूनी पेचिश ठीक हो जाती है।

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घाव सुखाने में शालाकी (लोबान) के लाभ (Shallaki Benefits in Wound Healing )

घाव को सुखाने के लिये शालकी के फल का चूर्ण प्राचीन काल से प्रयोग में लाया जाता रहा है। किसी भी प्रकार के घाव को सुखाने के लिये कॉटन को घाव के उपर रख कर उस कॉटन पर शालाकी को पाउडर रखना चाहिये। उसके बाद उस घाव को किसी अन्‍य कपड़े या कॉटन से बांध देना चाहिये। इस प्रक्रिया को करने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है।

तनाव में फायदेमंद शालाकी (Shallaki Beneficial to Treat Stress)

आजकल काम के बोझ के कारण लोग बहुत ही जल्‍दी तनाव में आ जाते हैं। तनाव कम करने के लिए बहुत से शालाकी का उपयोग किया जाता है। शालाकी की सुगंध मन को शान्‍ति प्रदान करती है जिस कारण तनाव कम हो जाता है।

बुखार उतारने में लोबान का औषधीय गुण लाभदायक (Loban Benefits in Fighting with Fever)

बुखार में तुरंत राहत प्राप्त करने के लिए इसका सेवन करना चाहिए । शालाकी फूल का चूर्ण 2-4 ग्राम लेने से बुखार में राहत मिलती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक शालाकी

एक अध्ययन के अनुसार शल्लकी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के गुण मौजूद होते हैं। इसका सेवन करने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय बनी रहती है और कम इम्‍यूनिटी वाले व्‍यक्‍तियों में यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।

कैंसर में फायदेमंद शालाकी (Benefit of Shallaki To Treat Cancer )

शल्लकी में कैंसर रोधी गुण भी पाए जाते हैं, जो कैंसर के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं।

मधुमेह को नियंत्रित करे शालाकी (Shallaki Beneficial to Control Diabetes)

शालाकी मधुमेह जैसी बीमारी को नियंत्रित करने में भी काफी लाभदायक होता है । वात और कफ दोष के असंतुलित होने जाने पर मधुमेह रोग हो जाता है। शल्लकी के प्रयोग से मधुमेह के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है साथ ही यह वात और कफ को दूर करने की क्षमता भी रखती है।

मुख रोगों में लाभदायक शालाकी

यह मुख रोग में भी लाभदायक है । शल्लकी में कषाय गुण होते हैं, जो मुख रोग में होने वाले बैक्‍टीरिया को कम करके मुख को स्वच्छ बनाते हैं, इसलिए मुख रोगों के लक्षणों को ठीक करने में शालाकी का काफी प्रयोग होता है।

त्वचा के लिए लोबान फायदेमंद (Shallaki Beneficial for Skin )

शालकी में पित्त शामक, कषाय एवं शीत गुण पाए जाते हैं जिसके कारण यह त्वचा को स्वस्थ बनाये रखता है और ठंडक भी प्रदान करता है।

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शालाकी कों इस्तेमाल करने का तरीका (How to use Shallaki)

शालाकी कई रोगों में बहुत फायदेमंद है जो आपको सरल भाषा बताए गए हैं। शालाकी का मात्रा प्रत्‍येक रोग के अलग–अलग है और शालाकी को प्रयोग करने का तरीका भी अलग–अलग है। इसलिये शालाकी का प्रयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से अवश्य परामर्श कर लेना चाहिये।

निष्कर्ष

शालाकी या लोबान, एक प्राचीन और महत्वपूर्ण प्राकृतिक औषधीय वृक्ष है। जिसका प्रयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा, धार्मिक और आध्यात्म के लिए किया जाता है। इसकी सुगंध से ध्यान और मेडिटेशन करने में मदद करती है, जिससे आपको शांति और आराम का अनुभव होता है। शालकी एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है, जो कई रोगों के इलाज में उपयोग किया जाता है। मुख्य रूप से इसका प्रयोग जोड़ों के दर्द में इसका उपयोग होता है ।

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प्रश्न और उनके उत्तर (F&Q)

1). शालाकी क्या है?

शालाकी (लोबान) एक प्राचीन और महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है। जिसका उपयोग बहुत से रोगों के इलाज़ में किया जाता है ।

2). शालाकी किन स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करता है?

आयुर्वेदिक चिकित्सा में शालाकी को विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे सूखी खांसी, जोड़ों का दर्द और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याएं।

3). क्या शालकी खाने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है?

शालकी खाने से स्वास्थ्य में कई लाभ मिल सकते हैं, जैसे मुंह की सफाई, मानसिक शांति और आयुर्वेदिक उपचार।

4). शालकी का उपयोग करने से कोई दुष्प्रभाव होते हैं?

शालाकी को आम तौर पर खाना सुरक्षित है, लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है, इसलिए इसका प्रयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही करना चाहिए ।

5). शालाकी कैसे मिल सकती है?

आप आयुर्वेदिक औषधि दुकानों से शालकी खरीद सकते हैं।

6). शालाकी कहाँ पाई जाती है ?

शालाकी(shallaki) का पेड़ भारत में मुख्यतः पश्चिमी हिमालय, उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के जंगलों में पाया जाता है।

7). क्या शालाकी से कैंसर ठीक हो सकता है?

हाँ ,शालाकी कैंसर के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। यह कैंसर के लक्षण कम करने की औषधि भी है ।

8). क्या शालाकी की छाल फायदेमंद है?

हाँ, शालाकी (लोबान) के पेड़ की छाल को चबाने से दाँतों का हिलना और दर्द दूर होता है। इसके अलावा इसकी छाल से कई रोगों का इलाज़ किया जाता है ।

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